जानता हूँ कि तुम महसूस करती हो,
खुशबू हमारी इन हवाओं में।
जानता हूँ कि तुम भीग जाती हो,
ओस की बूंदों से बनी कलाओं में।
कभी हँसती हो, तो कभी रोती हो
कभी उड़ती हुई धूल हो, तो कभी सागर में पड़ा मोती हो
किसी दौलत से नहीं, शोहरत से नहीं
मांगा है तुमहे कई जन्मों की दुआओं में।
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